प्रशांत भूषण ने वकालत के अपने लंबे करियर में अपनी जिरह और दलीलों के सहारे हजारों केसों का रुख बदला होगा लेकिन राम सेना के इंद्र वर्मा और उनके साथियों ने न तो उन्हें जिरह का मौका दिया और न ही दलील का
उनकी ताबड़तोड़ पिटाई करके उन्होनें अपना फैसला सुना दिया...
अब जरा अपने दिमाग पर जोर डालिए और याद करिए की इस तरह की तस्वीरें आपको कब कब और कहां कहां देखने को मिली है... जाहिर है आपको ज्यादा मेहनत नहीं करनी पड़ेगी.... मुंबई में ऑटो वालों के साथ मार-पीट हो या फिर वैलंटाइन डे पर प्यार करने वालों का सरेआम रुसवाई....न्यूज चैनलों के दफ्तर पर हमला हो या फिर साहित्य अकादमी के फंकशन में तोड़-फोड़... भगवा ब्रिगेड की काली करतूतों को हम सबने देखा है... इस सारी मेहनत और कवायद के पीछे मकसद एक ही होता है... हर कीमत पर अपनी बात को मनवाना... और जो उनकी बात नहीं मानते उनका वहीं हाल होता है जो एम एफ हुसैन का हुआ जिन्हें अपने मुल्क में दो गज जमीं भी नसीब नहीं हुई .....
अब बात कशमीर की... जो कुछ प्रशांत ने कहा उससे मैं भी इत्तेफाक रखता हूं और मेरे ख्याल से हर वो इंसान जो भारत से प्यार करता है वो इस बात को सही ठहरायगा... आखिर कशमीर को हमने अपनी आन बान का मुद्दा क्यों बना रखा है... हम क्यों हर साल अरबों रूपये खर्च करते है उन लोगों को अपने साथ रखने के लिए जो सरेआम पाकिस्तान जिंदाबाद के नारे लगाते है....
कशमीर, भारत का अभिन्न हिस्सा है... ये लाइन मैं अपने बचपन से सुनता आ रहा हूं... लेकिन क्या अपने अभिन्न हिस्सें को अपने साथ रखने के लिए इतनी मेहनत करनी पड़ती है...
क्या ताकत के जोर पर लोगों का इच्छाओं को दबाया जा सकता है? क्या यही लोकतंत्र है... मैं जो कुछ कह रहा हूं वो मुझे पाकिस्तानी ऐजेंट ठहराने के लिए काफी है और हो सकता है भगवा ब्रिगेड मेरा पता भी तलाशना शुरू कर दें... लेकिन फिर भी मैं अपनी बात कहूंगा... अब वक्त आ गया कशमीर पर सख्त फैसला लेने का... वहां पर जनमत संग्रह कराने का... ताकि हम चैन से रह सकें...

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